: छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी-कांग्रेस फिर से आमने-सामने, प्रदेश की सियासत में आया नया उबाल….!!
Admin Tue, May 2, 2023
छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी-कांग्रेस फिर से आमने-सामने, प्रदेश की सियासत में आया नया उबाल….!!
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा 58% आरक्षण पर रोक लगाने के फैसले के विरुद्ध 1 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उस रोक को हटा दिया है। अब इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने है। भाजपा का दावा है कि उनके शासनकाल में ही व्यवस्था लागू हुई जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सही बता दिया। दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि भाजपा की लापरवाही की वजह से आरक्षण रुका रहा वह तो कांग्रेस की कोशिश थी जिस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने रोक हटाई। दोनों दल के ही नेता एक-दूसरे पर अब तीखे सियासी तीर छोड़ रहे हैं।
इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि कांग्रेसियों द्वारा लगवाई गई अनुसूचित जनजाति आरक्षण पर रोक हटना भाजपा की वैचारिक जीत है। भाजपा शासनकाल में अनुसूचित जनजाति को 32 फ़ीसदी आरक्षण दिया गया जो भाजपा की सरकार रहते हुए सुरक्षित रहा। लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार आने के बाद अनुसूचित जनजाति का हक छीनने के लिए कांग्रेसी हाईकोर्ट चले गए। अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध हाईकोर्ट जाने वालों को सरकार ने उपकृत किया।
आरक्षण के नाम पर पैंतरेबाजी- चंदेल
नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि कांग्रेस आरक्षण के नाम पर केवल राजनीतिक पैंतरेबाजी दिखा रहे हैं। यदि वह छत्तीसगढ़ के सभी वर्गों को उचित आरक्षण दिलाने की मंशा रखते तो फिर क्वान्टिफायबल डाटा आयोग की रपट क्यों दबा कर रखी गई है। यह रिपोर्ट न तो सदन में रखी गई और न ही राज्यपाल को भेजी गई। जबकि आरक्षण विधेयक का आधार ही इसी डाटा आयोग की रपट को बताया जा रहा है। कांग्रेस आरक्षण के नाम पर केवल भ्रम फैलाने का काम कर रही है।
कांग्रेस सरकार 76 प्रतिशत आरक्षण देने को प्रतिबद्ध
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 58 प्रतिशत आरक्षण की बहाली का कांग्रेस ने स्वागत किया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय से राज्य में रुकी भर्तियां फिर से शुरू हो सकेंगी। यह निर्णय लक्ष्य नहीं है अंतिम लक्ष्य तो आरक्षण संशोधन विधेयक के लागू होने के बाद ही मिल सकेगा। कांग्रेस सरकार ने राज्य के सर्वसमाज के हित में विधानसभा में सर्वसम्मति से आरक्षण संशोधन विधेयक पारित करवा कर राज्यपाल के पास भेजा है। आरक्षण संशोधन विधेयक पिछले 4 महीने से राजभवन में लंबित पड़ा है, लेकिन राजभवन उस पर कोई निर्णय नहीं ले रहा जिसके कारण प्रदेश के आरक्षित वर्ग के लोगों को उनका हक नहीं मिल रहा
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