BREAKING NEWS

20 अक्टूबर का पंचांग: आज विजयादशमी, सुबह 11:48 से दोपहर 12:34 बजे तक अभिजीत मुहूर्त, जानें राहुकाल का समय

कर्क और तुला राशि वालों को मिलेगा रुका पैसा, मीन राशि वालों की बढ़ेगी जिम्मेदारी, अन्य जातक जानें अपना

पारदर्शी व्यवस्था और जनभागीदारी से मजबूत हो रहा जनता का विश्वास

दिवस पर राज्य स्तरीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रतियोगिता 12 व 13 नवंबर को

सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार: साय

Advertisment

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9753200176 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9753200176 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9753200176 है।

बस्तर संभाग में दंतेवाड़ा जिले के कसौली के किसान सुरेश कुमार नाग ने जिल : किसान खुद बना रहे जैविक खाद

बस्तर संभाग में दंतेवाड़ा जिले के कसौली के किसान सुरेश कुमार नाग ने जिले में पहली बार जैविक खेती करने का हौसला दिखाया और खेती में लगातार कई नवाचार किए। सुरेश सामान्य तरीके के बजाय मेडागास्कर पद्धति से धान की खेती कर रहे हैं।

इससे फसल की लागत को कम करने में सफलता मिली है। साथ ही खेत में रोटा, शनई, डेन्चा जैसी दलहनी फसलें उगाकर उनका उपयोग हरी खाद के रूप में कर रहे हैं। इससे मिट्‌टी की उर्वरा शक्ति और जल धारण क्षमता में काफी वृद्धि हुई है।

सुरेश कुमार ने बताया, मैंने जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाया तो कई चुनौतियां सामने आईं। पारंपरिक तरीके से खेती करने में एक हेक्टेयर रकबे में ही धान के 30 से 50 किलो बीज की खपत हो रही थी। इस पर मैंने मेडागास्कर व कतार पद्धति अपनाई।

मेडागास्कर पद्धति से कम पानी में भी धान की अच्छी पैदावार ली जा सकती है। सामान्य पद्धति में पानी से लबालब भरे खेतों में रोपाई की जाती है जबकि मेडागास्कर पद्धति में धान के पलहों की जड़ों में केवल नमी बनाए रखना आवश्यक होता है। इसमें पानी की खपत काफी कम होती है।

मेडागास्कर पद्धति में मुझे 8 से 12 किलो बीज में ही धान की पर्याप्त फसल मिलने लगी। बीजों की खपत लगभग 76 प्रतिशत कम हो गई। फसलों को कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए बाजार में मिलने वाले कीटनाशकों के बजाय खुद का बनाया जीवामृत काम में लेने लगा।

मिट्टी में जैविक नाइट्रोजन की वृद्धि

जैविक खाद के लिए खेत में चरोटा, शनई, डेन्चा जैसी दलहनी फसलों की बुवाई की। इससे मिट्टी में जैविक नाइट्रोजन की वृद्धि हुई। साथ ही मिट्‌टी की जलधारण क्षमता में सुधार आया। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में इस तरह की हरी खाद फायदेमंद रहती है। इन सब प्रयासों से धान की खेती की लागत लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गई।

कतार पद्धति से बुवाई के चलते पलहों को पर्याप्त धूप और अच्छे वायुसंचार का फायदा मिला। सुरेश कुमार का कहना है, अब तक 50 से ज्यादा किसानों को जैविक खेती करने की विधि सिखा चुका हूं। जैविक किसानों का एक समूह भी बना रहा हूं। इसके जरिए किसानों को जीवामृत, बीजामृत, हंडी दवा, मछली टॉनिक बनाने सहित खेती की अन्य विधियां सिखाऊंगा।

विज्ञापन

जरूरी खबरें