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9 महीने की गर्भवती प्रधान महिला आरक्षक गिरफ्तार : जेल में देगी बच्चे को जन्म

* ⁠9 महीने की गर्भवती प्रधान महिला आरक्षक गिरफ्तार

* जिस थाने में थी पदस्थ वहीं हुई गिरफ्तार

* ⁠आरक्षक ने चोरी के समान का किया था गबन

* पूर्व में भी नौकरी लगाने के नाम पर ले चुकी थी पैसे

* FIR दर्ज होते ही 4 मार्च 2025 से थी

दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र में एक बार फिर पुलिस की वर्दी में शर्मनाक करनामा सामने आया है, जहाँ चोरी के एक गंभीर मामले में जब्त कीमती सोने की ज्वेलरी का गबन करने के आरोप में बर्खास्त महिला प्रधान आरक्षक मोनिका गुप्ता को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि इस वक्त आरोपी प्रधान आरक्षक मोनिका गुप्ता 9 माह की गर्भवती है, उसने हाई कोर्ट में भी याचिका लगाई थी लेकिन वाहन से भी उन्हें जमानत नहीं मिला।

दरअसल, 4 जुलाई 2022 को दुर्ग के सिंधिया नगर स्थित सोनल द्विवेदी के घर से अज्ञात चोर ने 79 ग्राम सोने की ज्वेलरी और लगभग 32 हजार रुपये नकदी चुरा ली थी। पीड़िता ने इसकी शिकायत मोहन नगर थाने में दर्ज कराई थी। उस समय थाने में मौजूद प्रधान आरक्षक मोनिका गुप्ता ने ही शिकायत दर्ज की और जांच शुरू की।

30 जून 2023 को प्रधान आरक्षक मोनिका गुप्ता ने चोर को गिरफ्तार किया और उसके पास से चोरी का सामान (लगभग 2.5 लाख रुपये मूल्य की ज्वेलरी) बरामद की। लेकिन उन्होंने यह जेवरात पीड़िता को सौंपने के बजाय स्वयं अपने पास रख लिए। उच्च अधिकारियों को सूचित किया कि जप्त जेवरात आरक्षी केंद्र की अलमारी में सुरक्षित रख दिए गए हैं, जबकि वास्तव में वे वहाँ जमा ही नहीं किए गए थे।

इसके बाद विभागीय जांच शुरू हुई, जिसमें पाया गया कि आरक्षक ने जेवरात आरक्षी केंद्र में जमा नहीं किए, बल्कि अपने पास ही रखे हुए हैं। पीड़िता की शिकायत के बावजूद मोनिका गुप्ता ने जेवरात वापस नहीं लौटाए। विभाग ने उनसे कई बार स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

अंततः, 4 मार्च 2025 को उनके खिलाफ मोहन नगर थाने में FIR दर्ज की गई। FIR दर्ज होने के बाद से वे लगातार फरार थीं। बाद में 2 फरवरी 2026 को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

आरोपी महिला आरक्षक मोनिका गुप्ता के खिलाफ छत्तीसगढ़ गृह (पुलिस) विभाग में पहले भी ठगी का मामला सामने आ चुका था। जांच में साबित हुआ था कि उन्होंने एक व्यक्ति से उसकी बेटी को नौकरी दिलाने के नाम पर अवैध राशि ली थी और अपने पद का दुरुपयोग किया था। आरोपपत्र जारी होने और अंतिम स्मरण पत्र के बावजूद उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा।

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