‘रेशम से रोशन जशपुर’ : की शुरुआत, टसर उत्पादन में प्रदेश में जिला अव्वल
Vinod Prasad Tue, Aug 18, 2026
जशपुरनगर। मुख्यमंत्री ने ‘रेशम से रोशन जशपुर’ योजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि जिले में टसर एवं मलबरी रेशम कीटपालन को नई पहचान मिल रही है। वर्ष 2025-26 में जशपुर जिला टसर कोसा उत्पादन में पूरे छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान पर रहा है। रेशम उत्पादन से जिले के किसानों को स्वरोजगार के साथ अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल रहा है। जिला रेशम विभाग के अनुसार जिले में 1527.5 हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन एवं विकसित पौधरोपण किया गया है। वर्तमान में 66 रेशम उत्पादन केंद्र और 84 कृमिपालन समूह सक्रिय हैं। योजना से कुल 1939 किसान जुड़कर स्वरोजगार कर रहे हैं।
टसर कीटपालन से किसानों को अच्छी आमदनी
टसर कीटों के लिए साजा और अर्जुना प्रमुख खाद्य पौधे हैं। करीब 45 से 55 दिन के कीटपालन के बाद एक किसान को औसतन 15 हजार टसर ककून प्राप्त होते हैं। शासन द्वारा ककून को ग्रेड के अनुसार निर्धारित दर पर ककून बैंक के माध्यम से खरीदा जाता है। इससे किसानों को प्रति फसल लगभग 80 हजार से 1.20 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। विभाग की ओर से तकनीकी मार्गदर्शन के साथ रियायती दर पर स्वस्थ डिम्ब समूह भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
बीज उत्पादन और मलबरी से रोजगार के अवसर
टसर बीज उत्पादन योजना के तहत बीजागार निर्माण और बीज कोसा क्रय के लिए अनुदान दिया जा रहा है। एक बीज उत्पादक एक फसल में 3000 से 4000 स्वस्थ डिम्ब समूह तैयार कर उनकी बिक्री कर सकता है। वहीं मलबरी कीटपालन योजना के तहत निजी भूमि पर शहतूत बगान विकसित करने के लिए 5 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। इसमें भवन, पौधरोपण, सिंचाई और उपकरण शामिल हैं। पूर्ण विकसित बगान से प्रति एकड़ 300 से 400 किलो तक उत्पादन होने पर किसान को वार्षिक आय के साथ अंतरफसल का भी लाभ मिलता है।
महिलाओं को धागाकरण और कताई से आत्मनिर्भरता
महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए टसर धागाकरण एवं कताई योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत रीलिंग और स्पीनिंग मशीन पर शत-प्रतिशत अनुदान के साथ एक माह का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। जिले में वर्तमान में 14 धागाकरण समूह कार्यरत हैं, जिन्होंने अब तक 15,925.811 किलोग्राम धागे का उत्पादन किया है।
1.21 करोड़ से अधिक कोसा का उत्पादन
वर्ष 2025-26 में जिले में 1,21,65,649 नग कोसा फल का उत्पादन हुआ, जिसका बाजार मूल्य 72,84,820 रुपये बताया गया है। इसके अलावा 4,69,562 स्वस्थ डिम्ब समूह भी पालित किए गए। रेशम विभाग के अधिकारियों ने इच्छुक किसानों से नजदीकी रेशम उत्पादन केंद्र से संपर्क कर शासन की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की है।
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