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रायपुर। खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति के बीच नैनो : नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों की नई पसंद,कम लागत में बेहतर उत्पादन का विकल्प

Vinod Prasad Sun, May 31, 2026

रायपुर। खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति के बीच नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इन उर्वरकों के संतुलित उपयोग से खेती की लागत घटाने, उत्पादन बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल रही है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ सहित देशभर के किसानों का रुझान अब नैनो उर्वरकों की ओर बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार पारंपरिक खेती में प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी का उपयोग किया जाता है। मौजूदा कीमतों के हिसाब से केवल यूरिया और डीएपी पर किसानों का 1900 से 2200 रुपए तक खर्च हो जाता है। वहीं 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव लगभग एक बोरी यूरिया के बराबर माना जाता है। इससे खाद पर होने वाला खर्च कम होता है और परिवहन व भंडारण की लागत में भी बचत होती है।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के सूक्ष्म कण पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित किए जाते हैं। इससे फसलों को संतुलित पोषण मिलता है, पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार आता है। कई कृषि परीक्षणों में 5 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ने के संकेत भी मिले हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक नैनो उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मददगार है। इससे रासायनिक अवशेष कम होते हैं, भूजल प्रदूषण घटता है और मिट्टी की जैविक सक्रियता बनी रहती है। इसके अलावा आयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम होने से देश की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।

कृषि विभाग ने बताया कि प्रदेश में पारंपरिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। रायपुर जिले में वर्तमान में 9,102 मीट्रिक टन यूरिया और 3,092 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। साथ ही समितियों और कृषि सेवा केंद्रों के माध्यम से नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी की उपलब्धता भी लगातार बढ़ाई जा रही है, ताकि किसान आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की दिशा में आगे बढ़ सकें।

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