BREAKING NEWS

फांसी के फंदे से लटकी मिली लाश, इस वजह से उठाया खौफनाक कदम…!!

, चपेट में आया सुरक्षाबल के तीन जवान, एक की हालत गंभीर

मुख्यमंत्री के दौरे से पहले पूर्ण हों सुशासन तिहार की तैयारियां : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

राज्य के प्रथम लाभार्थी को मिला त्वरित लाभ, भुगतान स्वीकृत

जादू टोना के शक में चाकू गोदकर ग्रामीण की हत्या, दो भाईयों ने दिया घटना को अंजाम

Advertisment

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9753200176 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9753200176 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9753200176 है।

लोहड़ी पंजाब का खास त्योहार है। यह हर साल मकर संक्रांति से एक रात पहले : Lohri 2026 Shubh Muhurat: आज किस समय जलेगी लोहड़ी की अग्नि? नोट कर लें पूजा का शुभ मुहूर्त

Vinod Prasad Tue, Jan 13, 2026

नेशनल डेस्क : लोहड़ी पंजाब का खास त्योहार है। यह हर साल मकर संक्रांति से एक रात पहले मनाया जाता है। आज 13 जनवरी 2026 को पूरे भारत में लोग लोहड़ी का त्योहार खुशियों से मना रहे हैं। इस दिन लोग घरों के बाहर पवित्र अग्नि जलाते हैं और मूंगफली, पॉपकॉर्न, तिल-गुड़ जैसी चीजें अग्नि में अर्पित करते हैं। इसके बाद भंगड़ा-गिद्दा करते हुए ढोलक की थाप पर नाचते और गाते हैं।

लोहड़ी का शुभ मुहूर्त (Lohri Bonfire Timing 2026)

लोहड़ी की पवित्र अग्नि जलाने का शुभ मुहूर्त आज शाम 06:30 से शुरू होगा और 08:30 तक रहेगा। इस समय आप अग्नि जलाकर लोहड़ी की परंपरा निभा सकते हैं। इसके बाद अग्नि के चारों ओर 7 या 11 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।

लोहड़ी पूजा विधि (Lohri Puja Vidhi 2026)

सबसे पहले वह स्थान साफ-सुथरा कर लें, जहां अग्नि जलाई जाएगी। फिर  लकड़ियों का ढेर बनाकर उसमें आग जलाएं। परिवार के सभी लोग एक साथ बैठकर लोहड़ी की लोककथाएं और भांगड़ा-भाटी सुनें। अग्नि में तिल-गुड़, रेवड़ी, मक्का, गजक और मूंगफली जैसी चीजें अर्पित करें। अग्नि के चारों ओर 7 या 11 बार परिक्रमा करें। मक्का को नई फसल का प्रतीक मानकर अग्नि में डालना शुभ माना जाता है। इस दिन घरों में मकके की रोटी और सरसों का साग भी बनाया जाता है।

लोहड़ी का यह पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह किसान समुदाय के लिए नई फसल के आगमन और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक भी है। पूरे परिवार और समुदाय के लोग इस दिन एक साथ मिलकर त्योहार की खुशियां मनाते हैं।

विज्ञापन

जरूरी खबरें