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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हुए बड़े एं : CG HIGH COURT: एंटी नक्सल ऑपरेशन में बहादुरी, फिर भी नहीं मिला प्रमोशन! हाईकोर्ट ने डीजीपी को दिया अल्टीमेटम

Vinod Prasad Thu, Feb 12, 2026

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हुए बड़े एंटी नक्सल ऑपरेशन में साहसिक भूमिका निभाने वाले पुलिस जवानों की आउट ऑफ टर्न प्रमोशन (असामान्य पदोन्नति) के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता जवानों के लंबित प्रतिनिधित्व पर कानून के अनुसार दो माह के भीतर निर्णय लें। यह आदेश न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू ने (दीपक कुमार नायक व अन्य बनाम राज्य शासन) में पारित किया।

यह है पूरा मामला

याचिकाकर्ता दीपक कुमार नायक, अग्नु राम कोर्राम और संगीत भास्कर, ये तीनों पुलिस जवान कांकेर जिले में पदस्थ हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे 15 एवं 16 अप्रैल 2024 को बीएसएफ के साथ संयुक्त रूप से चलाए गए बड़े एंटी नक्सल ऑपरेशन का हिस्सा थे। यह ऑपरेशन कांकेर जिले के कालपर-हापाटोला-छेटेबेठिया क्षेत्र में हुआ, जहां 40-50 सशस्त्र माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई। इस कार्रवाई में 29 सशस्त्र नक्सली मारे गए, जिनमें 15 पुरुष एवं 14 महिलाएं शामिल थीं। साथ ही बड़ी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद भी जब्त किया गया।

केवल 54 पुलिसकर्मियों को मिला प्रमोशन

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि इस सफल ऑपरेशन में कुल 187 पुलिसकर्मी शामिल थे, लेकिन शासन द्वारा केवल 54 पुलिसकर्मियों को ही पुलिस विनियम 70(क) के तहत आउट ऑफ टर्न प्रमोशन का लाभ दिया गया, जबकि याचिकाकर्ता भी समान परिस्थितियों में ऑपरेशन का हिस्सा थे। इसी भेदभाव से आहत होकर उन्होंने 25 जून 2025 को पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज के समक्ष प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया, जो अब तक लंबित है।

हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ताओं का दावा अभी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में कोर्ट ने इस स्तर पर सीधे पदोन्नति का आदेश न देकर, प्रतिनिधित्व के शीघ्र निस्तारण का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पुलिस महानिदेशक याचिकाकर्ताओं के प्रतिनिधित्व पर पुलिस विनियम 70(क) के अनुसार कानून सम्मत एवं निष्पक्ष निर्णय लें। यह निर्णय दो माह के भीतर किया जाए। यदि याचिकाकर्ताओं का मामला उन 54 पदोन्नत पुलिसकर्मियों के समान पाया जाता है, तो उनकी आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जाए।

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